बजाय प्यार की शबनम मेरे गुलिस्ताँ में,
बरसते रहते है हर सिम्त मौत के साए,
स्यहियों से उलझ पड़ती है मेरी आँखें
कोई नही, कोई भी नही,
जो बतलाए मैं कितनी देर उजलों की राह देखूँगा,
कोई नही, है कोई भी नही,
ना पास, ना दूर,
एक यार है दिल की धड़कन,
अपनी चाहत का जो एलान किए जाती है,
ज़िंदगी है जो जीए जाती है,
खून के घूँट पीए जाती है,
ख्वाब काँटों से सीए जाती है|
1 comment:
ye hai meri kahani..
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