आज एक बार और पूरब से सूरज उगा था,
एक और बार आज पश्चिम में वो डूब गया.
कुछ पौधे इस दौरान थोड़े उँचे, थोड़े सक्षम हो गये,
कुछ पेड़ों में उस अंतराल जीवनदायी फल लग गये,
कुछ पत्ते इस बीच छाया देने के लिए चौड़े हो गये,
और कुछ कलियाँ इस दरमियाँ खिल के फूल हो गयी.
कहीं किसी ने इस दौरान प्यार का इज़हार कर दिया,
उस अंतराल किसी ने इकरार और किसी ने इनकार कर दिया,
कहीं किसी ने इस बीच कुछ नया खोज निकाला,
तो कहीं किसी ने इस दरमियाँ एक नया अविष्कार कर दिया.
हम बैठे थे इस दौरान एक बाग में खाट लगा कर,
ताका अंतहीन चीज़ों को उस अंतराल में आराम फरमा कर,
कुछ लोगों का इस बीच पक्ष पुराना कल नही आया,
हमारा तो इस दरमियाँ बरसों पुराना अगला पल नही आया.
एक और बार आज पश्चिम में वो डूब गया.
कुछ पौधे इस दौरान थोड़े उँचे, थोड़े सक्षम हो गये,
कुछ पेड़ों में उस अंतराल जीवनदायी फल लग गये,
कुछ पत्ते इस बीच छाया देने के लिए चौड़े हो गये,
और कुछ कलियाँ इस दरमियाँ खिल के फूल हो गयी.
कहीं किसी ने इस दौरान प्यार का इज़हार कर दिया,
उस अंतराल किसी ने इकरार और किसी ने इनकार कर दिया,
कहीं किसी ने इस बीच कुछ नया खोज निकाला,
तो कहीं किसी ने इस दरमियाँ एक नया अविष्कार कर दिया.
हम बैठे थे इस दौरान एक बाग में खाट लगा कर,
ताका अंतहीन चीज़ों को उस अंतराल में आराम फरमा कर,
कुछ लोगों का इस बीच पक्ष पुराना कल नही आया,
हमारा तो इस दरमियाँ बरसों पुराना अगला पल नही आया.
5 comments:
wah wah ... kavita me badi gaharai hai ..you to jivan me ghatit hone wali choti choti ghatanao ka warnan hai lekin dhyan purvak dekha jaye to sampurne jivan chakra ...is nirpeksh bhav se jivan ki taraf keval surya hi dekh sakata hai ... kahi ye samay chakra chalane wale surya ka warnan to nahi hai ???
Nice one.....deep one...
very well written yaar..............teri har ek poem mein bahut deep meaning hota hai .......har baar ke tarah es baar be utna he maja aaya........:):)aise he likhte raho aur padate raho:)
Nice poem... loved the concept and the way it was presented :)...
Good work :)
@sumeet: aapka swagat hai, jan kar achha laga ki aapko kavita pasand aayi.
@vinay: meri soch se alag par kafi dilchasp drishtikon hai.
@ranu, meenu: in dayalu shabdon ke liye shukriya. :D
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