शीर्षक का कविता(अगर इससे कहा जा सके तो) से संबंध बहुत असंबंधित है.
बदलाव की ज़रूरत है, अंतिम रूप अभी दूर है.
(ref: water water every where, not a drop to drink
found some after all, now its too cold to swill)
सूरज प्रत्यक्ष गवाह है,
और चाँद साक्षी है,
ना कोई खेलता है इन चौकोर खानो में,
ना कोई भटकता है इन गलियारों में|
अनध्यारे है फैले चारों तरफ,
रोशनी लूका छुपी खेल रही है,
दिल के दरवाज़े पे खट्ट खट्ट से,
आज सालों बाद आहट कोई हुई है|
नूरानी चेहरा देख हर जगह हलचल मची है,
गुलाबी रंग में आज पहली बार कोई जची है,
कोमल सी काया है, उषा सी ताज़गी है,
ऐसे ही थोड़ी वो दिल में आके बसी है|
भोली-भली सी, मासूमियत की मूरत है,
जब भी देखो लगती बड़ी खूबसूरत है,
(पता है cheesy है, this is the first candidate to be changed)
प्यार कैसी कोई ना करे उससे,
हर बंदे को किसी ऐसे की ज़र्रोरत है|
आज बदल फूट फूट के रो रहे हैं,
पवन बावरी हो इधर-उधर मंडरा रही है,
गलियों फिर सुनसान होने लगी हैं,
क्युन्किआज वो शहर छोड़ कर जा रही है|