नीले पानी में लाखों जुगनू तैर रहे हों जैसे|
अपार सागर,कोयल सी काली रात में सिर्फ़ हम दोनो खड़े हैं,
उसे मेरे लिए और मुझे उसके लिए बनाया हो जैसे|
चाँदनी उस सुंदर चेहरे को रोशन कर रही है,
कोई जुगनू उसके लिए सागर छोड़ आया हो जैसे|
ठंडी पूर्वाई केशों को मुख पर संवार रही है,
किसी परी को श्याम काजल लगाने आ रही हो जैसे|
उसके दिव्य सौंदर्ययुक्त चेहरे को देख, लालच आता है ऐसे,
कोयले की खान में, इत्तेफ़ाक़ से चमकता हीरा मिल गया हो जैसे|
कोमल अद्रों को मिलाने की चाहत है, तमन्ना है, ज़रूरत है ऐसी,
अर्सों से तट पर पड़ी नाव की नदी में फिर तैरने की ख्वाहिश होती है जैसी|
कुछ ऐसा दिखता: