तेरी आँखों की है जो जूस्तजू, उसे मैं पहचान ना सका,
देख उन्हे हुआ बेकाबू, और होश संभाल ना सका,
उज्वल पन्ने पे स्याह स्याही से लिखी है जो पहेली,
उसे चकोर जैसे ताकता रहा, पर कभी बुझा ना सका,
वाकिफ़ है श्याम पट जड़ित संगेमरमर की दीवारें,
भीतर की उलझनों में से दिल का रास्ता पा ना सका,
गुमान था तेरी फेहरिस्त-ए-तमन्नाओं में नहीं था शामिल,
शायद यादों में रह जाऊँगा, नसीब में तो ना आ सका|
देख उन्हे हुआ बेकाबू, और होश संभाल ना सका,
उज्वल पन्ने पे स्याह स्याही से लिखी है जो पहेली,
उसे चकोर जैसे ताकता रहा, पर कभी बुझा ना सका,
वाकिफ़ है श्याम पट जड़ित संगेमरमर की दीवारें,
भीतर की उलझनों में से दिल का रास्ता पा ना सका,
गुमान था तेरी फेहरिस्त-ए-तमन्नाओं में नहीं था शामिल,
शायद यादों में रह जाऊँगा, नसीब में तो ना आ सका|