वो आई थी आज बाज़ार, सुना था हमने मज़मे से,
पर वो बेरहम, दीदार कराए बिना ही चल दिए,
उनकी खूबसूरती को समझेंगे, ख़याल था ऐसा ज़ेहन में,
और वो अदय, हमारी आँखों को अधूरा छोड़ कर चल दिए,
दुनिया लूटा देंगे उनपे, ठाना था एक दिन हमने मन में,
और वो हमें उनकी एक कौड़ी का मोहताज बनाकर चल दिए,
सोचा था कभी करेंगे गुफ्तगू डाले हाथों में हाथ,
और वो निर्दयी, हमसे बिना नज़र मिलाए ही चल दिए,क्या करें|
पर वो बेरहम, दीदार कराए बिना ही चल दिए,
उनकी खूबसूरती को समझेंगे, ख़याल था ऐसा ज़ेहन में,
और वो अदय, हमारी आँखों को अधूरा छोड़ कर चल दिए,
दुनिया लूटा देंगे उनपे, ठाना था एक दिन हमने मन में,
और वो हमें उनकी एक कौड़ी का मोहताज बनाकर चल दिए,
सोचा था कभी करेंगे गुफ्तगू डाले हाथों में हाथ,
और वो निर्दयी, हमसे बिना नज़र मिलाए ही चल दिए,क्या करें|