यूँ हुए उसके तुकड़े हज़ार
कि भीग गयी नम अाँखे
कि थर्राए गये कांपते होंठ
कि तप गयी गरम साँसें
अटका कुछ एसे वो धडक़ता दिल
कि मौन हो पड़ा धीमा स्वर
कि रुक गयी सुस्त नब्ज़
अौर थम गए सरकते पल
कि भीग गयी नम अाँखे
कि थर्राए गये कांपते होंठ
कि तप गयी गरम साँसें
अटका कुछ एसे वो धडक़ता दिल
कि मौन हो पड़ा धीमा स्वर
कि रुक गयी सुस्त नब्ज़
अौर थम गए सरकते पल