ना रहे आर, ना पहुँचे पार,
उलझनों में फँसे हम मजधर,
उन्हे सुलझाना ही एक चारा है,
अभी दूर किनारा है|
प्रवाह पानी का भारी है,
तैराकी सीखना जारी है,
उसे सीखना ही एक चारा है,
अभी दूर किनारा है|
डूबे थे पर फिर उभरे,
ख्वाहिशों से दिल हैं भरे,
उमीद रखना ही एक चारा है,
अभी दूर किनारा है|
अनगिनत मोती है सतह के नीचे,
संपन्न जीवन है तट के पीछे,
ना डूबना ही एक चारा है,
अभी दूर किनारा है|
साहिल को कैसे भी पाना है,
थकी भुजाओं को समझना है,
दूसरा ना कोई सहारा है,
अभी दूर किनारा है|
उलझनों में फँसे हम मजधर,
उन्हे सुलझाना ही एक चारा है,
अभी दूर किनारा है|
प्रवाह पानी का भारी है,
तैराकी सीखना जारी है,
उसे सीखना ही एक चारा है,
अभी दूर किनारा है|
डूबे थे पर फिर उभरे,
ख्वाहिशों से दिल हैं भरे,
उमीद रखना ही एक चारा है,
अभी दूर किनारा है|
अनगिनत मोती है सतह के नीचे,
संपन्न जीवन है तट के पीछे,
ना डूबना ही एक चारा है,
अभी दूर किनारा है|
साहिल को कैसे भी पाना है,
थकी भुजाओं को समझना है,
दूसरा ना कोई सहारा है,
अभी दूर किनारा है|