तुम से हमे मोहब्बत भी है, और चाहत भी है,
तुम्हारे आने पे दिल में हुई एक आहट सी है|
करना तो आगाज़ से चाहते थे इज़हार,
डर जाते थे, कहीं कर ना दो तुम इनकार|
प्रेम के ढाई अक्षर कहने की कर रहा हूँ जुरत,
बस इतना ही कहना था की तुम हो जीने की ज़रूरत|
इक़रार के लिए तुम्हारी बस एक मुस्कान काफ़ी है
तुम बिन लगता है जैसे ज़िंदगी पूरी होना बाकी है|
तुम्हारे आने पे दिल में हुई एक आहट सी है|
करना तो आगाज़ से चाहते थे इज़हार,
डर जाते थे, कहीं कर ना दो तुम इनकार|
प्रेम के ढाई अक्षर कहने की कर रहा हूँ जुरत,
बस इतना ही कहना था की तुम हो जीने की ज़रूरत|
इक़रार के लिए तुम्हारी बस एक मुस्कान काफ़ी है
तुम बिन लगता है जैसे ज़िंदगी पूरी होना बाकी है|
1 comment:
क्या बात है लड़के.. लव-शव में पड़ गया है ऐसा प्रतीत होता है।
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